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    Home»राज्य»छत्तीसगढ़»स्कूलों का हाल ऐसा रहा तो कैसे बनेगा स्मार्ट क्लासरूम: शिक्षा मंत्री
    छत्तीसगढ़

    स्कूलों का हाल ऐसा रहा तो कैसे बनेगा स्मार्ट क्लासरूम: शिक्षा मंत्री

    By June 20, 2024No Comments4 Mins Read
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    स्कूलों का हाल ऐसा रहा तो कैसे बनेगा स्मार्ट क्लासरूम: शिक्षा मंत्री
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    रायपुर
    प्रदेश में नए शिक्षा सत्र प्रारंभ होने से पहले शिक्षामंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली। इस दौरान विश्वस्तरीय शिक्षा मुहैया कराने के लिए सभी स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम और ई-क्लास रूम बनाने के निर्देश दिए। साथ ही, राज्य के ज्यादा से ज्यादा स्कूलों का पीएम श्री योजना के तहत अपग्रेडेशन करने के निर्देश दिए हैं। बैठक में शिक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए तथा विभिन्न कार्ययोजनाओं पर चर्चा की गई। बैठक में शिक्षकों की भर्ती, वेतन विसंगति, पदोन्नति, नई शालाओं के निर्माण समेत विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा कर जानकारी ली।

    मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा, राज्य में शिक्षा के स्तर को विश्वस्तरीय बनाने के लिए हम लगातार कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री से स्वीकृति के बाद राज्य में शिक्षकों के 33 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके साथ ही राज्य में वेतन विसंगति और संयुक्त संचालक, उप संचालक, प्राचार्य, व्याख्याता, उच्च वर्ग शिक्षक, प्रधानपाठक (माध्यमिक शाला) की पदोन्नति के लिए अधिकारियों को निर्देश दिया गया। मंत्री ने इन सारी विसंगतियां को जल्द से जल्द दूर करने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया।

    डीएमएफ की राशि से स्कूलों की मरम्मत
    मंत्री अग्रवाल ने सभी शासकीय और गैर शासकीय स्कूलों में नि:शुल्क पाठ्य-पुस्तक उपलब्ध कराने के लिए पाठ्य पुस्तक निगम को निर्देश देते हुए कहा, पुस्तकों को जिलास्तर पर उपलब्ध कराया जाए, वहां से सभी स्कूलों में शिक्षा सत्र प्रारंभ होने से पहले ही भेज दिया जाए। उन्होंने प्रदेश के जर्जर होते स्कूलों की बिल्डिंग और नए भवनों के निर्माण के लिए डीएमएफ और सीएसआर मद से कार्य कराने के निर्देश दिए। निर्माण कार्यों के लिए शिक्षा विभाग की अलग से इंजीनियरिंग सेल निर्माण प्रक्रिया को जल्द ही पूर्ण करने के लिए भी अधिकारियों को निर्देश दिया।

    ऐसा है प्रदेश के स्कूलों का हाल
    1.जांजगीर-चांपा : 32 स्कूल भवन विहीन, 61 स्कूल एकल शिक्षकीय
    नए शिक्षा सत्र की शुरूआत भले ही एक अप्रैल से कर ली गई है, लेकिन डेढ़ माह क्लास लगने के बाद भी स्कूलों में तैयारी पूरी तरह से अधूरी है। बता दें कि जांजगीर-चांपा व सक्ती जिले मिलाकर 1612 प्राइमरी व 793 मिडिल स्कूल के अलावा 134 हाई व 143 हायर सेकंडरी स्कूल संचालित है। जिले भर में प्राइमरी व मिडिल स्कूल मिलाकर चार दर्जन ऐसे स्कूल भवन हैं जो पूरी तरह से जर्जर हैं। ब्रिटिशकालीन खपरैला वाले भवन में बच्चे जान जोखिम में डालकर भविष्य गढऩे मजबूर हैं।

    2. राजनांदगांव: सैंकड़ों स्कूल जर्जर, खतरों के बीच करेंगे पढ़ाई बच्चे
    शिक्षा विभाग के अधिकारी स्कूलों का जीर्णोद्धार कराने की बजाय हाथ पर हाथ धरे बैठे हुए हैं, जिसका खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ सकता है। नए जिले मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के औंधी समीप स्थित आलकन्हार गांव स्थित प्राथमिक शाला भवन जर्जर है। बच्चों को सांस्कृतिक मंच में बिठाकर पढ़ाई कराते हैं। बारिश में तो स्कूल बंद होने की नौबत आ जाती है। राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में करीब 424 स्कूल जर्जर थे। जिसमें 265 स्कूल बिल्डिंग की मरम्मत हो पाई है। 150 स्कूलों में कार्य प्रगति पर है। वहीं 9 जर्जर स्कूलों की मरम्मत अब तक शुरू नहीं हो पाई।

    3. कवर्धा : 402 डिस्मेंटल योग्य स्कूलों में फिर से संचालित होंगी कक्षाए
    इस शिक्षा सत्र में भी हजारों बच्चे जान हथेली पर लेकर कक्षाओं में पढ़ाई करेंगे क्योंकि यहां पर 402 शासकीय स्कूल भवन जर्जर और डिस्मेंटल योग्य हो चुके हैं। बाजवूद वहां पर कक्षाएं संचालित होती है। जिले में शासकीय स्कूल से नींव गढऩे वाले बच्चों का भविष्य जर्जर और तोडऩे योग्य भवन से शुरू होता है। कबीरधाम जिले में कुल 1494 शासकीय प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक स्कूल हैं, लेकिन इसमें से 402 स्कूल भवन जर्जर हैं या तोडऩे लायक हो चुके हैं। हालात तो ऐसे हैं कि 168 स्कूल भवन पूरी तरह से कंडम हो चुके हैं।

    4. शिक्षकों व इन सुविधाओं की कमी
    दो दर्जन स्कूल अभी भी जुगाड़ के भवन में संचालित हो रहा है। इन स्कूलों के पास खुद का भवन नहीं है। जांजगीर चांपा जिले में 16 तो इतने ही शैक्षणिक जिले सक्ती में भी इतने ही स्कूल भवन विहीन हैं। कोई स्कूल हाईस्कूल भवन में तो कोई स्कूल मिडिल स्कूल के भवन में संचालित हो रहा है। बात दें कि कई स्कूलों के भवन बनकर तैयार है, लेकिन भवन में बिजली पानी जैसे कई खामियां होने के कारण संबंधित स्कूल के प्राचार्य भवन को हैंडओवर लेने तैयार नहीं है। स्कूलों में अभी भी सैकड़ों शिक्षकों की कमी बरकरार है।

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