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    Home»राज्य»मध्यप्रदेश»उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान की शिक्षण पद्धति अन्य संस्थानों के लिए अभिप्रेरणा का केंद्र बने : उच्च शिक्षा मंत्री परमार
    मध्यप्रदेश

    उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान की शिक्षण पद्धति अन्य संस्थानों के लिए अभिप्रेरणा का केंद्र बने : उच्च शिक्षा मंत्री परमार

    By October 1, 2024No Comments3 Mins Read
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    उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान की शिक्षण पद्धति अन्य संस्थानों के लिए अभिप्रेरणा का केंद्र बने : उच्च शिक्षा मंत्री परमार
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    भोपाल : उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार की अध्यक्षता में भोपाल स्थित उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान की सामान्य परिषद् की बैठक हुई। बैठक में संस्थान की गतिविधियों, कार्यों एवं आगामी कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा की गई। मंत्री परमार ने विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा कर विद्यार्थियों के समग्र विकास, बेहतर अध्ययन-अध्यापन, वार्षिक गतिविधियों एवं अकादमिक गुणवत्ता में उत्तरोत्तर सुधार के लिये आवश्यक क्रियान्वयन के लिए दिशा निर्देश दिए। मंत्री परमार ने कहा कि विद्यार्थियों के हितों से जुड़े सभी कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण करें। वर्तमान परिदृश्य एवं उद्योग जगत की आवश्यकता अनुरूप रोजगारपरक पाठ्यक्रमों पर विशेष ध्यान दें। परमार ने कहा कि संस्थान आदर्श रूप में स्थापित होकर अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए अभिप्रेरणा का केंद्र बने, ऐसी कार्ययोजना के साथ क्रियान्वयन करें। परमार ने कहा कि अन्य शासकीय महाविद्यालयों के सम्बंधित अधिकारियों को इस संस्थान का भ्रमण करवाकर, यहाँ की शिक्षण पद्धतियों से अवगत कराया जाना चाहिए। परमार ने कहा कि संस्थान में उत्तरोत्तर गुणवत्ता वृद्धि हो, इससे विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित होगा।

    प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन ने कहा कि विद्यार्थियों से निरंतर संवाद सुनिश्चित करें और शिक्षा में गुणवत्ता से कोई समझौता न हो। विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने की दिशा में सतत् क्रियान्वयन हो।

    बैठक में संस्थान से सम्बंधित अनेक बिंदुओं पर व्यापक चर्चा कर विद्यार्थियों के हितार्थ निर्णय लिए गए। संस्थान में निर्मित होने वाले ऑडिटोरियम में उपकरणों एवं फर्नीचर के लिए अतिरिक्त राशि 1 करोड़ रुपए राशि का आबंटन, आगामी सत्र से बीसीए पाठ्यक्रम को प्रारम्भ किया जाना, भारतीय ज्ञान परम्परा से सम्बंधित शोध पत्रिका "शोध सेतु" का प्रकाशन, नवीन विषयों तथा कक्षाओं के लिये नवीन भवन के निर्माण के लिए 3 करोड़ रुपए राशि की स्वीकृति, नवीन उपकरणों, फर्नीचर तथा कंप्यूटर के लिए बजट की स्वीकृति जैसे अनेक निर्णय लिए गए।

    सामान्य परिषद् ने संस्थान की शिक्षण पद्धति, समयपूर्वक परीक्षा परिणामों का घोषित किया जाना एवं शोध के क्षेत्रों में नवाचारों की सराहना की। कृषि पाठ्यक्रम के सम्बन्ध में संस्थान द्वारा तैयार की गयी अध्ययन सामग्री की भी सराहना की गई।

    इस अवसर पर संस्थान के वार्षिक प्रगति प्रतिवेदन का विमोचन किया गया। संस्थान के प्राध्यापकों द्वारा संकलित पुस्तक "रिलिवेंस ऑफ़ ब्लेंडेड मोड ऑफ़ टीचिंग एंड लर्निंग इन हायर एजुकेशन" तथा संस्थान के डॉ. अमित मांडले द्वारा लिखित पुस्तक "बेसिक्स ऑफ़ रिसर्च मेथडोलॉजी" का विमोचन भी किया गया।

    बैठक में संस्थान के संचालक डॉ. प्रज्ञेश अग्रवाल सहित वित्त, योजना, खेल, लोक निर्माण एवं अन्य विभागों के प्रतिनिधि एवं सामान्य परिषद के सदस्यगण उपस्थित रहे।

    संस्थान के भारतीय ज्ञान परम्परा प्रकोष्ठ "सांदीपनि कक्ष" का शुभारंभ

    उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान के भारतीय ज्ञान परम्परा प्रकोष्ठ "सांदीपनि कक्ष" का उद्घाटन कर पुस्तकालय में उपलब्ध पुस्तकों का अवलोकन किया।

    इस अवसर पर मंत्री परमार ने संस्थान के प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों से भारतीय पुरातन ज्ञान की गूढ़ता एवं महत्व के सम्बन्ध में अपने विचार साझा किए। परमार ने उपस्थितजनों को कृतज्ञता के भाव से समृद्ध, भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता के बारे में अवगत कराया। परमार ने भारतीय पुरातन ज्ञान को वैज्ञानिक दृष्टिकोण के आधार पर युगानुकुल परिप्रेक्ष्य में दस्तावेजीकरण करने की आवश्यकता बताया। परमार ने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा में प्रकृति के प्रति संरक्षण के भाव का दर्शन है।

    इस दौरान प्रमुख सचिव राजन ने संस्थान के पुस्तकालय को और अधिक छात्रोपयोगी बनाने के लिए, इसे वातानुकूलित किये जाने और पर्याप्त संख्या में कंप्यूटर लगाए जाने के निर्देश दिए।

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