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    Home»राज्य»छत्तीसगढ़»पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शुक्ला की मौत के 19 साल बाद नरेंद्र यादव उर्फ ​​नरेंद्र जॉन पर मामला दर्ज
    छत्तीसगढ़

    पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शुक्ला की मौत के 19 साल बाद नरेंद्र यादव उर्फ ​​नरेंद्र जॉन पर मामला दर्ज

    News DeskBy News DeskApril 21, 2025No Comments6 Mins Read
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    पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शुक्ला की मौत के 19 साल बाद नरेंद्र यादव उर्फ ​​नरेंद्र जॉन पर मामला दर्ज
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    बिलासपुर

    फर्जी हार्ट सर्जन नरेंद्र यादव की गिरफ्तारी के बाद लगातार हैरान करने वाले खुलासे हो रहे हैं। नरेंद्र यादव ने 19 साल पहले छत्तीसगढ़ के पूर्व विधानसभा स्पीकर राजेंद्र प्रसाद शुक्ला की सर्जरी की थी और सर्जरी के बाद उनकी मौत हो गई थी। अब आरोपी डॉक्टर के खिलाफ बिलासपुर में गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है। एक अधिकारी ने रविवार को बताया कि 'फर्जी' हृदय रोग विशेषज्ञ नरेंद्र यादव उर्फ ​​नरेंद्र जॉन कैम और बिलासपुर के एक निजी अस्पताल पर शनिवार को 19 साल पहले पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शुक्ला की मौत के मामले में गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है।

    पुलिस अधिकारी के अनुसार यादव और निजी अस्पताल के खिलाफ गैर इरादतन हत्या (धारा 304), धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। बिलासपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) रजनेश सिंह ने बताया कि यादव को मध्य प्रदेश के दमोह स्थित एक अस्पताल में गलत सर्जरी के बाद सात मरीजों की मौत के मामले में गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने यहां निजी अस्पताल में शुक्ला का ऑपरेशन किया था, जिसके बाद पूर्व विधानसभा अध्यक्ष की मौत हो गई थी।
    2006 में हुई थी मौत

    कोटा विधानसभा क्षेत्र से तत्कालीन कांग्रेस विधायक शुक्ला का 2006 में बिलासपुर के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया था। वे 2000 से 2003 तक छत्तीसगढ़ विधानसभा के पहले अध्यक्ष रहे थे। पूर्व स्पीकर के बेटे प्रदीप शुक्ला ने हाल ही में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि जब उनके पिता इस निजी अस्पताल में भर्ती थे, तब यादव उस अस्पताल में काम करते थे। शिकायत में कहा गया है, "यादव ने मेरे पिता की हार्ट सर्जरी की थी और उन्हें 18 दिनों तक वेंटिलेटर पर रखा गया था। इसके बाद 20 अगस्त 2006 को उन्हें मृत घोषित कर दिया गया था। अस्पताल प्रबंधन ने मेरे पिता के इलाज के लिए राज्य सरकार से 20 लाख रुपये लिए थे।"
    प्रदीप शुक्ला ने लगाए गंभीर आरोप

    प्रदीप शुक्ला ने कहा कि उन्हें हाल ही में मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से यादव और दमोह अस्पताल में हुई मौतों के बारे में पता चला। एसएसपी सिंह ने बताया कि पुलिस ने पाया है कि यादव की डिग्री फर्जी है तथा भारतीय चिकित्सा परिषद/छत्तीसगढ़ चिकित्सा परिषद में उसके पंजीकरण का दस्तावेज अभी तक नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रबंधन ने बिना उचित जांच के यादव को हृदय रोग विशेषज्ञ के रूप में नियुक्त करके पूर्व विधानसभा अध्यक्ष शुक्ला के साथ-साथ कई अन्य हृदय रोगियों के जीवन के साथ खिलवाड़ किया।
    दमोह में 7 मौतों के बाद हुई गिरफ्तारी

    यादव को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) द्वारा शिकायत मिलने के बाद गिरफ्तार किया गया था, जिसमें दावा किया गया था कि मिशन अस्पताल, दमोह में सात लोगों की मौत हो गई थी, जहां उन्होंने हृदय रोगों के इलाज के नाम पर मरीजों का ऑपरेशन किया था। इंदौर स्थित एक रोजगार परामर्श फर्म के निदेशक ने पिछले सप्ताह कहा था कि यादव ने 2020 से 2024 के बीच नौकरी के लिए तीन बार अपना बायोडाटा भेजा था और दावा किया था कि उन्होंने हजारों मरीजों का ऑपरेशन किया है।
    नरेंद्र यादव बोले- मेरी सारी डिग्रियां असली

    2024 में अपनी फर्म को भेजे गए 9 पन्नों के बायोडाटा में यादव ने खुद को वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ बताया था और अपना स्थायी पता ब्रिटेन में बर्मिंघम बताया था। बायोडाटा में उसने यह भी बताया था कि वह हजारों हृदय रोगियों के ऑपरेशन में शामिल रहा है, जिसमें 18,740 "कोरोनरी एंजियोग्राफी" और 14,236 "कोरोनरी एंजियोप्लास्टी" शामिल हैं, निदेशक ने कहा। आरोपी नरेंद्र यादव ने खुद को एक "बड़ी साजिश" का शिकार बताया है और दावा किया है कि उनकी डिग्रियां असली हैं।

    अस्पताल की गंभीर लापरवाही सामने आई

    आरोप है कि आरोपी डॉक्टर ने फर्जी डिग्री के आधार पर इलाज किया और लापरवाही से मौत का कारण बना. स्व. राजेन्द्र शुक्ल के बेटे डॉक्टर प्रदीप शुक्ला की शिकायत के बाद IPC की धारा 420, 465, 466, 468, 471, 304, 34 के तहत 19 अप्रैल को मामला दर्ज किया गया. FIR में अपोलो प्रबंधन को भी आरोपी बनाया गया. आरोप है कि बिना दस्तावेज सत्यापन के अस्पताल प्रबंधन ने फर्जी डॉक्टर को भर्ती कर इलाज का मौका दिया. अस्पताल प्रबंधन के पास ना ही कोई डॉक्टर से संबंधित उपयोगिता और विशेषज्ञ का दस्तावेज है केवल बायोडाटा लेकर ही आरोपी डॉक्टर की पदस्थापना कर दी गई। इसी से गंभीर लापरवाही हुई और मरीज की जान चली गई.
     CMHO कार्यालय को अब तक नहीं दी जानकारी

    19 साल बाद दिवंगत राजेंद्र शुक्ल के बेटे प्रदीप का बयान सामने आने के बाद CMHO डॉ. प्रमोद तिवारी ने गंभीरता से लिया था. उन्होंने अपोलो अस्पताल प्रबंधन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया कि किस आधार पर डॉक्टर की नियुक्ति की गई थी..? वहीं प्रबंधन ने अब तक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए. जिसके कारण  विभागीय जांच में देरी हो रही है। उसकी शैक्षणिक योग्यता से संबंधित दस्तावेज पेश करने को कहा गया था. साथ ही पूर्व विधानसभा अध्यक्ष समेत कई लोगों की मौत के मामले में डॉक्टर के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई थी. इस मामले में स्वास्थ्य विभाग की भी जांच जारी है.

    ढाई महीने में 15 ऑपरेशन, 7 की मौत

    दमोह के मिशन अस्पताल में लंदन के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. एन जोन केम के नाम पर फर्जी डॉक्टर ने ढाई महीने में 15 हार्ट ऑपरेशन कर डाले. आरोप है कि दिसंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच हुए इन ऑपरेशन में 7 मरीजों की मौत हो गई. इसका खुलासा तब हुआ जब एक मरीज के परिजन ने संदेह होने पर डॉक्टर की शिकायत की. इसके बाद मामला मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया.

    मामला 4 अप्रैल को सुर्खियों में आया, जब राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट की. इसमें मिशन अस्पताल में 7 हार्ट पेशेंट्स की मौत और फर्जी डॉक्टर का जिक्र किया. 7 मरीजों की मौत के बाद जांच हुई तो आरोपी डॉक्टर नरेंद्र विक्रमादित्य यादव का बिलासपुर कनेक्शन सामने आया. बिलासपुर में भी ये कई लोगों की जान ले चुका है. इनमें सबसे बड़ा नाम छत्तीसगढ़ विधानसभा के पहले अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शुक्ल का भी है.

    बायोडाटा लेकर ही नौकरी दे दी गई थी

    राजेंद्र प्रसाद अविभाजित मध्यप्रदेश में भी विधानसभा अध्यक्ष रह चुके हैं. दमोह में मौत के बाद उनके बेटे प्रदीप शुक्ल ने ये आरोप लगाए. तब 2006 में डॉ. नरेंद्र बिलासपुर के अपोलो अस्पताल में पदस्थ था. उनको नियुक्ति कैसे दी गई? इस पर अब सवाल उठे, जिसके बाद मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय की तरफ से अस्पताल से जवाब मांगा गया. जिसके बाद खुलासा हुआ.ऐसे फर्जी डॉक्टर को केवल बायोडाटा लेकर ही नौकरी दे दी गई. तत्कालीन रमन सिंह सरकार के द्वारा उनके अच्छे इलाज के लिए चुने गए, इस अपोलो हॉस्पिटल में बड़ी लापरवाही हुई.उसके साथ ही सरकार से बाकायदा लाखों रुपये फीस भी ले ली गई.

    News Desk

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