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    मध्यप्रदेश

    मध्यप्रदेश में मौसम का कहर: ‘मोंथा’ तूफान और तीन सिस्टम के असर से 11 जिलों में तेज बारिश

    News DeskBy News DeskOctober 29, 2025No Comments7 Mins Read
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    मध्यप्रदेश में मौसम का कहर: ‘मोंथा’ तूफान और तीन सिस्टम के असर से 11 जिलों में तेज बारिश
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    भोपाल 

    राजधानी भोपाल में मोंथा तूफान का असर देखा जा रहा है. मौसम वैज्ञानिकों ने मध्य प्रदेश में तीन अलग-अलग सिस्टम एक्टिव होने के चलते कुल 11 जिलों में भारी बारिश का अनुमान किया है. मंगलवार को मोंथा तूफान के असर से सात जिलों में बारिश हुई थी, जिससे भोपाल और इंदौर शहर अछूता नहीं था.

    रिपोर्ट के मुताबिक मोंथा तूपान का असर मंगलवार को मध्य प्रदेश में देखा गया, जब तीन अलग-अलग सिस्टम एक्टिव होने से कुल सात जिलों में जमकर बारिश हुई. मोंथा तूफान का ही असर कहेंगे कि मौसम वैज्ञानिकों ने बुधवार को श्योपुर, मुरैना समेत 11 जिलों में बुधवार को भारी बारिश का अलर्ट भेजा है. 

    मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट

    मौसम विभाग ने (29 अक्टूबर) के लिए श्योपुर, मुरैना, बुरहानपुर, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, डिंडौरी और अनूपपुर जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। वहीं प्रदेश के अन्य जिलों में भी हल्की से मध्यम बारिश, आंधी और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है।

    मौसम वैज्ञानिक के मुताबिक, वर्तमान सिस्टम के प्रभाव से अगले चार दिन तक प्रदेश में बारिश का दौर जारी रहेगा। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों ओर बने सिस्टम की वजह से नमी लगातार आ रही है, जिससे बादल छाए रहेंगे और मौसम ठंडा रहेगा।

    अगले चार दिनों तक मध्य प्रदेश में है बारिश के आसार

    मोंथा तूफान के असर से मध्य प्रदेश में अगले चार दिनों तक बारिश और गरज-चमक का दौर बना रहेगा. जिन 11 जिलों में बारिश का अनुमान किया गया है, उन जिलों में बारिश के चलते दिन और रात के तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे लोगों को कड़ाके वाली ठंड का एहसास होगा.  

    छत्तीसगढ़ में चक्रवातीय तूफान का असर बढ़ने की संभावना

    मौसम विभाग ने अगले 3 दिनों तक पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में चक्रवातीय तूफान मोंथा के असर से कई जिलों में तेज हवाओं और भारी बारिश की चेतावनी दी है. इनमें दक्षिण छत्तीसगढ़ के पांच जिलों क्रमशः नारायणपुर, बस्तर, बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा जिले शामिल हैं, जहां रेड अलर्ट जारी किया गया है.

    भोपाल-इंदौर में चली तेज आंधी

    28 अक्टूबर को ग्वालियर, रतलाम, धार, बैतूल, श्योपुर, शिवपुरी, रीवा, मुरैना और उमरिया में अच्छी बारिश हुई। वहीं राजधानी भोपाल में दिनभर बादल छाए रहे और शाम को तेज आंधी चली। रतलाम में करीब 3 इंच, ग्वालियर में 2.5 इंच, जबकि शिवपुरी में 1.5 इंच बारिश दर्ज की गई। बारिश से कई जिलों में तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई। ग्वालियर का दिन का तापमान 25 साल में सबसे कम 19.5°C तक पहुंच गया।

    मंगलवार को 9 जिलों में पानी गिरा सिस्टम की एक्टिविटी होने की वजह से मंगलवार को बैतूल, धार, रतलाम, मुरैना, ग्वालियर, श्योपुर, शिवपुरी, रीवा और उमरिया में बारिश हुई। भोपाल में तेज आंधी का असर देखने को मिला। बारिश की वजह से कई जिलों में फसलों को नुकसान भी पहुंचा है।

    बता दें कि मध्य प्रदेश से मानसून की आधिकारिक विदाई हो चुकी है, लेकिन बारिश का दौर जारी है। 29, 30 और 31 अक्टूबर को भी तेज बारिश हो सकती है। 30 अक्टूबर को सिस्टम का सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा।

     

    अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के दो सिस्टम एक्टिव

    मौसम विभाग के अनुसार, अरब सागर में बना डिप्रेशन तेजी से उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ रहा है, जबकि बंगाल की खाड़ी में बना तूफान ‘मोंथा’ आंध्र प्रदेश तट को पार कर चुका है। इन दोनों सिस्टम्स से मिलने वाली नमी की वजह से मध्य प्रदेश के ऊपर ट्रफ लाइन एक्टिव है, जिससे लगातार बारिश हो रही है। प्रदेश के कई हिस्सों में अगले 48 घंटे तक बादल और गरज-चमक के साथ भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
    30 और 31 अक्टूबर को कैसा रहेगा मौसम

    30 अक्टूबर (गुरुवार) को पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी है।

    ऑरेंज अलर्ट: सतना, रीवा, सीधी, शहडोल, अनूपपुर और सिंगरौली में 4 से 8 इंच तक वर्षा संभव।

    येलो अलर्ट: पन्ना, कटनी, उमरिया, डिंडौरी, मंडला, सिवनी, बालाघाट, छिंदवाड़ा, झाबुआ, अलीराजपुर और बड़वानी।

    31 अक्टूबर (शुक्रवार) को भी कई जिलों में बारिश का दौर जारी रहेगा।

    भारी बारिश का अलर्ट: झाबुआ, अलीराजपुर, बैतूल, पांढुर्णा, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर और शहडोल।

    मौसम विभाग का कहना है कि, 1 नवंबर तक प्रदेश का मौसम ऐसा ही रहेगा और 2 नवंबर से बादल छंटने लगेंगे। इसके बाद धीरे-धीरे ठंड बढ़ने लगेगी।
    25 साल में अक्टूबर का सबसे ठंडा दिन

    लगातार बारिश और बादलों की वजह से ग्वालियर का तापमान 19.5°C तक गिर गया, जो अक्टूबर महीने में 25 सालों का सबसे ठंडा दिन रहा। श्योपुर में भी तापमान 13.3°C तक लुढ़क गया। वहीं खंडवा में अधिकतम तापमान 31.5°C दर्ज किया गया, जो प्रदेश में सबसे अधिक रहा।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, नवंबर से फरवरी तक इस बार ठंड सामान्य से ज्यादा रहेगी। 2010 के बाद की सबसे ठंडी सर्दी इस बार महसूस की जा सकती है। ‘ला-नीना’ की परिस्थितियां बनने से सर्दियों के दौरान भी सामान्य से ज्यादा बारिश और तेज ठंडी हवाएं चलने की संभावना है।

    नवंबर-जनवरी में पड़ेगी कड़ाके की सर्दी मौसम विभाग के अनुसार, नवंबर से कड़ाके की ठंड का दौर शुरू हो जाता है, जो जनवरी तक रहता है। इस बार फरवरी तक ठंड का असर रहने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि आने वाले सर्दियों के मौसम में 2010 के बाद सबसे भीषण ठंड का एहसास हो सकता है।

    सर्दियों के दौरान इस बार सामान्य से ज्यादा बारिश देखने को मिल सकती है, उत्तर-पश्चिम भारत के इलाकों में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ अधिक संख्या में प्रभावित करेंगे। मौसम विभाग ने भी जल्द ही ला-नीना परिस्थितियां विकसित होने की पुष्टि की है।

    पूरे एमपी से विदा हो चुका है मानसून मौसम विभाग के अनुसार, पूरे मध्य प्रदेश से मानसून विदा हो गया है। इस साल मानसून 3 महीने 28 दिन एक्टिव रहा। 16 जून को प्रदेश में मानसून की एंट्री हुई थी और 13 अक्टूबर को वापसी हुई। इसके बावजूद बारिश का दौर बना हुआ है। अक्टूबर का आखिरी सप्ताह भी बारिश वाला ही रहेगा। इसके बाद ठंड का असर शुरू हो जाएगा।

    इस बार प्रदेश में मानसून की 'हैप्पी एंडिंग' रही। भोपाल, ग्वालियर समेत 30 जिले ऐसे रहे, जहां 'बहुत ज्यादा' बारिश दर्ज की गई। ओवरऑल सबसे ज्यादा बारिश वाला जिला गुना है। जहां पूरे सीजन 65.7 इंच पानी गिर गया, जबकि श्योपुर में 216.3% बारिश हुई। हालांकि, शाजापुर ऐसा जिला है, जहां सबसे कम 28.9 इंच (81.1%) ही बारिश हुई है।

    50 जिलों में मानसून का कोटा फुल मानसूनी सीजन में मौसम विभाग ने प्रदेश में 106 प्रतिशत बारिश होने का अनुमान जताया था, लेकिन 15 प्रतिशत पानी ज्यादा गिर गया। ग्वालियर-चंबल संभाग के जिलों में दोगुनी बारिश हो गई। इंदौर, ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल, सागर संभाग के 50 जिलों में कोटा फुल रहा। वहीं, भोपाल, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग के 4 जिले- उज्जैन, शाजापुर, बैतूल और सीहोर में 81.1 से 98.6 प्रतिशत बारिश हुई। इन जिलों में कोटा पूरा नहीं हो पाया।

    हालांकि, इनमें से तीन जिले- उज्जैन, सीहोर और बैतूल में आंकड़ा 94% से ज्यादा ही है। इस वजह से ये सामान्य बारिश के आसपास ही है, लेकिन शाजापुर 'बारिश की भारी कमी' की कैटेगरी में है। यहां कोटे का 81 प्रतिशत पानी ही गिरा।

    मानसून में 50 जिलों का कोटा फुल

    आधिकारिक रूप से मानसून 13 अक्टूबर को विदा हो चुका है, लेकिन इस साल बारिश ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है। मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में औसतन 37.2 इंच के मुकाबले 48 इंच बारिश दर्ज की गई  यानी 121% बारिश। गुना जिले में सबसे ज्यादा 65.7 इंच, श्योपुर में 216%, जबकि शाजापुर में सबसे कम 28.9 इंच (81%) बारिश दर्ज की गई। 50 जिलों में मानसून का कोटा फुल रहा। वहीं भोपाल, उज्जैन, सीहोर और बैतूल जैसे कुछ जिलों में थोड़ी कमी रही।

    News Desk

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