Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
    • Home
    • About Us
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    Facebook X (Twitter) Instagram
    News Monitor 24
    • Home
    • देश
    • विदेश
    • राज्य
    • मध्यप्रदेश
      • मध्यप्रदेश जनसंपर्क
    • छत्तीसगढ़
      • छत्तीसगढ़ जनसंपर्क
    • राजनीती
    • धर्म
    • अन्य खबरें
      • मनोरंजन
      • खेल
      • तकनीकी
      • व्यापार
      • करियर
      • लाइफ स्टाइल
    News Monitor 24
    Home»देश»बजट में बच्चों को क्या मिला, एक और अवसर चूक गई सरकार?…
    देश

    बजट में बच्चों को क्या मिला, एक और अवसर चूक गई सरकार?…

    By July 30, 2024No Comments6 Mins Read
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr WhatsApp Email Telegram Copy Link
    बजट में बच्चों को क्या मिला, एक और अवसर चूक गई सरकार?…
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Pinterest Email

    “…जब भी तुम्हें संदेह हो तो उस सबसे गरीब और कमज़ोर आदमी/स्त्री का चेहरा याद करो जिसे तुमने देखा हो और खुद से पूछो कि तुम जो कदम उठाने जा रहे हो, क्या उससे उस आदमी को कोई फायदा होगा।” महात्मा गांधी

    दुनिया में बच्चों की सबसे बड़ी आबादी भारत में है। देश की कुल आबादी में 44.20 करोड़ बच्चे हैं और आबादी में 37 प्रतिशत हिस्सा 18 साल से कम उम्र के बच्चों का है।

    संसद में हाल ही में पेश हुआ बजट और आने वाले दो बजट हमारे लिए वो अवसर हैं जहां हम एक पूरी पीढ़ी के सपनों और उनमें छिपी संभावनाओं का इस्तेमाल भविष्य के भारत को संवारने में कर सकते हैं।  

    आज के स्वस्थ और शिक्षित बच्चे देश के कल की संपत्ति हैं। आज जब भारत विश्वगुरु बनने की राह पर है तो इस यात्रा में हमें अपने बच्चों को भी साथ लेकर चलना होगा और उन्हें शोषण से मुक्ति दिलानी होगी।

    बजटीय आबंटनों में बच्चों को प्राथमिकता किसी चयन या विकल्प का विषय नहीं है बल्कि समृद्ध भारत की एक पूर्व शर्त है। लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि 2024-25 के केंद्रीय बजट ने देश के बच्चों के सामने मौजूद सबसे तात्कालिक चुनौतियों खास तौर से ट्रैफिकिंग (दुर्व्यापार), बंधुआ मजदूरी और शोषण से उनकी सुरक्षा और उनके समग्र विकास की दिशा में बढ़ने का मौका गंवा दिया है। 

    असंगठित क्षेत्र में बच्चों से बाल मजदूरी ट्रैफिकिंग का सबसे निकृष्टतम रूप है लेकिन इस सच्चाई से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता कि यह हमारे समय की एक दुर्भाग्यपूर्ण वास्तविकता है। और यह इस तथ्य के बावजूद है कि कानूनन मनुष्यों का दुर्व्यापार प्रतिबंधित है और भारत के संविधान के अनुच्छेद 23 में वर्णित मौलिक अधिकारों के तहत दंडनीय है।

    जब इस तरह के मामले प्रकाश में आते हैं तो मजिस्ट्रेट या सब डिवीजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) इस बात की तस्दीक करने के लिए मामले की जांच करता है कि वह बच्चा वास्तव में बंधुआ मजदूर है या नहीं। जांच और सत्यापन के बाद बच्चा या बच्ची अगर बंधुआ मजदूर घोषित की जाती है तो उसे एक ‘रिलीज सर्टीफिकेट’ या रिहाई प्रमाणपत्र जारी किया जाता है।

    ऐसे में यदि आरोपी को अदालत से सजा होती है तो बंधुआ मजदूरों के पुनर्वास की केंद्र की योजना के तहत पीड़ित बच्चा 3 लाख रुपए तक के मुआवजे का हकदार है अगर वह जाहिरा तौर पर किसी वेश्यालय, मसाज पार्लर, प्लेसमेंट एजेंसी में यौन शोषण या ट्रैफिकिंग से पीड़ित हुआ हो तो।

    2017 से 2024 (मार्च) के बीच विभिन्न राज्य सरकारों ने 3341 बच्चों को बंधुआ मजदूरी करते पाया और उन्हें ‘रिलीज सर्टीफिकेट’ जारी किए। इन बच्चों के लिए मुआवजे की रकम 100 करोड़ से भी ज्यादा बैठती है और यह राशि केंद्रीय बजट से दी जानी है।  

    लेकिन स्थिति यह है कि बंधुआ बाल मजदूरों को क्षतिपूर्ति योजना के तहत आबंटित राशि 2023-24 के बजट में आबंटित 20 करोड़ रुपए से घटाकर इस बार 6 करोड़ कर दी गई है। ऐसे में यदि बच्चे से बंधुआ मजदूरी कराने के आरोपी को सजा हुई और हर बच्चे को 3 लाख रुपए का मुआवजा मिला तो 6 करोड़ रुपए की इस राशि से महज 200 बाल मजदूरों का पुनर्वास हो सकता है। बाकी बचे 3141 बंधुआ बाल मजदूरों को संविधान में दी गई गारंटी के बावजूद न्याय से वंचित रहना पड़ेगा। 

    नीरजा चौधरी बनाम मध्य प्रदेश राज्य (1984) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि मुक्त कराए गए बंधुआ मजदूरों के पुनर्वास में नाकामी उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है और पुनर्वास के बिना सिर्फ बंधुआ मजदूरी से मुक्ति बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम 1976 के उद्देश्यों को पूरा नहीं करती।  

    श्रम, कपड़ा और कौशल विकास विकास (2022-23) पर लोकसभा की स्थायी समिति की 41वीं रिपोर्ट इस बात को रेखांकित करती है कि श्रम व रोजगार मंत्रालय की ओर से राज्यों व केंद्रशासित क्षेत्रों को बार-बार परामर्श भेजने के बावजूद बंधुआ मजदूरी के उन्मूलन के प्रयासों ने कतई रफ्तार नहीं पकड़ी है।

    समग्र पुनर्वास के अभाव में ये बच्चे देरसबेर फिर उसी गरीबी, अशिक्षा और दासता की कैद में फंस जाएंगे जिससे इन्हें मुक्त कराया गया है।

    21वीं सदी के भारत में इस दुष्चक्र के जारी रहने की कोई वजह नहीं है। बाल श्रम, बंधुआ मजदूरी के उन्मूलन और पुनर्वास राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना और केंद्र की अन्य योजनाओं के अधीन विषय हैं।

    ऐसे में केंद्रीय बजट में इन योजनाओं को आबंटित राशि में भारी कटौती से बंधुआ मजदूरी और बच्चों से बंधुआ मजदूरी सहित बाल सुरक्षा की दिशा में हाल के वर्षों में देश ने जो भी प्रगति की है, उस पर पानी फिरने का खतरा है।

    बजट आबंटन में यह कटौती 2030 तक तकरीबन 18 करोड़ 40 लाख बंधुआ मजदूरों की पहचान, उनकी मुक्ति और पुनर्वास के केंद्र सरकार के सपने को पूरा करने की राह में बाधा बन सकती है।

    इन लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए दिशानिर्देशों के पालन और उन पर समय से अमल के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग बंधुआ मजदूरों की पहचान, उनकी मुक्ति और पुनर्वास के लिए दो परामर्श जारी कर चुका है।  

    अगर बच्चों के श्रेणीकरण, उद्योगों की सूची और जुर्माने की बात करें तो बाल मजदूरी के खात्मे के लिए भारत की नीतिगत रूपरेखाएं सबसे समग्र और विश्व में सबसे बेहतर मानी जा सकती हैं। इसे शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 से और बल मिला है जो इस उद्देश्य से लाया गया था कि बच्चों का स्कूल जाना सुनिश्चित किया जाए ताकि उन्हें बचपन में ही मजदूरी के दलदल में फंसने से बचाया जा सके।  

    बंधुआ मजदूरी के इरादे से बाल दुर्व्यापार में शामिल लोगों के तौर-तरीकों, प्रौद्योगिकी के उपयोग और ट्रैफिकिंग के लिहाज से संवेदनशील और उभरते केंद्रों के बाबत नवीनतम जानकारियों से लैस रहने में मदद करते हैं। हालंकि, यह संवैधानिक आज्ञा सरकारी खजाने से अतिरिक्त समर्थन की मांग करती है ताकि कानून की भावना और नीतियां जमीनी स्तर पर क्रियान्वित होकर ठोस बदलावों में रूपांतरित हो सकें।

    यह स्पष्ट है कि पुनर्वास के इंतजाम के बगैर बच्चों को बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराने की इस पूरी कसरत का कोई फायदा नहीं है। लिहाजा, केंद्र सरकार से बंधुआ मजदूरों के पुनर्वास के लिए केंद्रीय बजट और इसी तरह की केंद्र की अन्य योजनाओं के लिए आबंटित राशि पर पुनर्विचार का आग्रह है ताकि विजन 2050 की हमारी यात्रा गति पकड़ सके और संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप 2025 तक बाल मजदूरी के सभी स्वरूपों का खात्मा हो सके।

    (भुवन ऋभु प्रख्यात बाल अधिकार कार्यकर्ता, अधिवक्ता और चर्चित किताब ‘व्हेन चिल्ड्रेन हैव चिल्ड्रेन : टिपिंग प्वाइंट टू इंड चाइल्ड मैरेज’ के लेखक हैं। ये उनके निजी विचार हैं।)

    The post बजट में बच्चों को क्या मिला, एक और अवसर चूक गई सरकार?… appeared first on .

    Related Posts

    फरीदाबाद में ब्रेनवॉश के बावजूद जसीर वानी ने सुसाइड बॉम्बर बनने से किया इनकार

    November 18, 2025

    क्या अब गांव का कचरा भी हम देखें? सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार

    November 18, 2025

    पद्मिनी को परेशान किया तो धमाका कर दूंगा: मेट्रो स्टेशन को मिला धमकीभरा मेल

    November 18, 2025

    बिहार में कांग्रेस की 6 सीटें जीतने पर घमासान, INDIA गठबंधन के नेताओं ने कसा तंज

    November 18, 2025

    बेंगलुरु: ₹145 के वेज सैंडविच में मिला झींगा, स्विगी-रेस्टोरेंट पर ₹1 लाख का मुआवजा

    November 18, 2025

    SC की चेतावनी: आरक्षण 50% से ज्यादा हुआ तो चुनाव रोकने तक जा सकते हैं कदम

    November 18, 2025
    विज्ञापन
    विज्ञापन
    हमसे जुड़ें
    • Facebook
    • Twitter
    • Pinterest
    • Instagram
    • YouTube
    • Vimeo
    अन्य ख़बरें

    नशामुक्त अभियान देश को खुशहाल बनाने का अभियान : मंत्री कुशवाह

    November 18, 2025

    नियमित फॉलोअप करें और समयसीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ कार्य करें पूर्ण: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

    November 18, 2025

    फरीदाबाद में ब्रेनवॉश के बावजूद जसीर वानी ने सुसाइड बॉम्बर बनने से किया इनकार

    November 18, 2025

    एमपी ट्रांसको के 48 वर्ष पुराने पिपरिया 132 के.वी. सब स्टेशन का रिमॉडलिंग कार्य पूर्ण

    November 18, 2025
    हमारे बारे में

    यह एक हिंदी वेब न्यूज़ पोर्टल है जिसमें ब्रेकिंग न्यूज़ के अलावा राजनीति, प्रशासन, ट्रेंडिंग न्यूज, बॉलीवुड, खेल जगत, लाइफस्टाइल, बिजनेस, सेहत, ब्यूटी, रोजगार तथा टेक्नोलॉजी से संबंधित खबरें पोस्ट की जाती है।

    Disclaimer - समाचार से सम्बंधित किसी भी तरह के विवाद के लिए साइट के कुछ तत्वों में उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत सामग्री ( समाचार / फोटो / विडियो आदि ) शामिल होगी स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक इस तरह के सामग्रियों के लिए कोई ज़िम्मेदार नहीं स्वीकार करता है। न्यूज़ पोर्टल में प्रकाशित ऐसी सामग्री के लिए संवाददाता / खबर देने वाला स्वयं जिम्मेदार होगा, स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक की कोई भी जिम्मेदारी नहीं होगी. सभी विवादों का न्यायक्षेत्र रायपुर होगा

    हमसे सम्पर्क करें
    संपादक -
    मोबाइल -
    ईमेल -
    कार्यालय -
    April 2026
    M T W T F S S
     12345
    6789101112
    13141516171819
    20212223242526
    27282930  
    « Nov    
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • Home
    • About Us
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.