Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
    • Home
    • About Us
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    Facebook X (Twitter) Instagram
    News Monitor 24
    • Home
    • देश
    • विदेश
    • राज्य
    • मध्यप्रदेश
      • मध्यप्रदेश जनसंपर्क
    • छत्तीसगढ़
      • छत्तीसगढ़ जनसंपर्क
    • राजनीती
    • धर्म
    • अन्य खबरें
      • मनोरंजन
      • खेल
      • तकनीकी
      • व्यापार
      • करियर
      • लाइफ स्टाइल
    News Monitor 24
    Home»देश»जब घर वालों ने ही शिबू सोरेन को दिया था धोखा, गंवानी पड़ गई थी झारखंड के मुख्यमंत्री की कुर्सी…
    देश

    जब घर वालों ने ही शिबू सोरेन को दिया था धोखा, गंवानी पड़ गई थी झारखंड के मुख्यमंत्री की कुर्सी…

    By February 2, 2024No Comments4 Mins Read
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr WhatsApp Email Telegram Copy Link
    जब घर वालों ने ही शिबू सोरेन को दिया था धोखा, गंवानी पड़ गई थी झारखंड के मुख्यमंत्री की कुर्सी…
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Pinterest Email

    लगभग ढाई दशक के झारखंड के इतिहास में रघुबर दास को छोड़कर एक भी मुख्यमंत्री ने पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं किया है।

    जमीन घोटाला मामले में ईडी की गिरफ्तारी के बाद हेमंत सोरेन को भी चार साल बाद ही पद से इस्तीफा देना पड़ा है।

    उनके पिता और झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष शिबू सोरेन जिन्होंने झारखंड आंदोलन का बढ़-चढ़कर नेतृत्व किया, के नाम सबसे कम दिनों तक मुख्यमंत्री रहने और मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए विधानसभा उप चुनाव हार जाने का भी रिकॉर्ड है। 

    हालांकि, शिबू सोरेन तीन-तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री बने लेकिन कभी भी वह छह महीने का कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। 2005 में पहली बार झारखंड बनने के बाद विधानसभा के चुनाव हुए थे।

    81 सदस्यीय विधानसभा में किसी भी दल या गठबंधन को बहुमत नहीं मिला था। हालांकि, 30 सीटें जीतकर बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। जेडीयू उस वक्त बीजेपी के साथ थी, जिसे 6 सीटें मिली थीं। यानी NDA को कुल 36 सीटें मिली थीं।

    शिबू सोरेन की पार्टी झामुमो को तब सिर्फ 17 सीटों पर जीत मिली थी। उसकी सहयोगी पार्टी कांग्रेस को 9 सीटें मिली थीं। इस तरह यूपीए को कुल 26 सीटें मिली थीं, जो एनडीए से 10 कम थी।

    बावजूद इसके राज्यपाल सैयद सिब्ते रजी ने शिबू सोरेन को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया था। शिबू उस वक्त केंद्र की यूपीए सरकार में मंत्री थे और 42 विधायकों के समर्थन का दावा किया था।

    राज्यपाल रजी ने तब एनडीए के सरकार बनाने के दावे को ठुकरा दिया था। बहरहाल, 2 मार्च, 2005 को शिबू सोरेन को मुख्यमंत्री पद की थपथ दिलाई गई लेकिन उनकी सरकार 10 दिनों में ही गिर गई। वह बहुमत साबित करने में विफल रहे।

    इसके बाद बीजेपी की अगुवाई में एनडीए सरकार बनी। अर्जुन मुंडा सीएम बने। उन्हें मधि कोड़ा समेत तीन निर्दलीय विधायकों ने भी समर्थन दिया था।

    सितंबर 2006 में तीनों निर्दलीय विधायकों ने मुंडा सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया। इसके बाद 18 सितंबर, 2006 को निर्दलीय मधु कोड़ा नाटकीय घटनाक्रम में मुख्यमंत्री बने।

    उनकी सरकार में झामुमो, राजद, एनसीपी, फॉरवर्ड ब्लॉक शामिल रही। कांग्रेस ने कोड़ा सरकार को बाहर से समर्थन दिया। कोयला घोटाला में फंसने के बाद उन्हें कुर्सी छोड़नी पड़ी।

    28 अगस्त 2008 को जब शिबू सोरेन दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने, तब वह दुमका से सांसद थे। मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के लिए उनके सामने छह महीने के अंदर यानी 28 फरवरी 2009 तक झारखंड विधानसभा का सदस्य बनने की संवैधानिक मजबूरी थी।

    तब उनके लिए एक सुरक्षित सीट की तलाश की जा रही थी, जहां से वह आसानी से जीत दर्ज कर सकें लेकिन बिडंबना देखिए कि जिस शख्स ने सैकड़ों विधायक और दर्जनों सांसद बनाए, उसके लिए कोई भी अपनी सीट छोड़ने को तैयार नहीं था।

    वरिष्ठ पत्रकार अनुज कुमार सिन्हा ने अपनी किताब ‘झारखंड: राजनीति और हालात’ में लिखा है, “जब गुरूजी (शिबू सोरेन) को चुनाव लड़ने के लिए एक सीट की जरूरत पड़ी, तो कोई भी सीट खाली करने को तैयार नहीं हुआ। यहां तक कि बेटा और बहू भी अपनी सीट छोड़ने को राजी ना हुए। पुराने दोस्तों ने भी ऐसा करने से इनकार कर दिया और कहा कि जब बेटे-बहू ने सीट खाली नहीं की तो हम क्यों करें?”

    किताब में लिखा गया है कि तब उनके ही विधायकों ने उनसे बोर्ड-निगम में पदों के लिए खूब बारगेनिंग की थी। चंपई सोरेन भी तब सरायकेला से झामुमो के ही विधायक थे।

    खैर, जेडीयू विधायक रमेश सिंह मुंडा के निधन से खाली हुई तमाड़ सीट पर उप चुनाव में शिबू सोरेन यूपीए के उम्मीदवार बनाए गए लेकिन झारखंड पार्टी के उम्मीदवार गोपाल कृष्ण पातर उर्फ ​​राजा पीटर ने उन्हें हरा दिया।

    इस तरह छह महीने का कार्यकाल पूरा किए बिना शिबू सोरेन को दूसरी बार पद छोड़ना पड़ा था। उन्हें मुख्यमंत्री पद से 18 जनवरी 2009 को इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद झारखंड में पहली बार राष्ट्रपति शासन लगा था। 

    Related Posts

    फरीदाबाद में ब्रेनवॉश के बावजूद जसीर वानी ने सुसाइड बॉम्बर बनने से किया इनकार

    November 18, 2025

    क्या अब गांव का कचरा भी हम देखें? सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार

    November 18, 2025

    पद्मिनी को परेशान किया तो धमाका कर दूंगा: मेट्रो स्टेशन को मिला धमकीभरा मेल

    November 18, 2025

    बिहार में कांग्रेस की 6 सीटें जीतने पर घमासान, INDIA गठबंधन के नेताओं ने कसा तंज

    November 18, 2025

    बेंगलुरु: ₹145 के वेज सैंडविच में मिला झींगा, स्विगी-रेस्टोरेंट पर ₹1 लाख का मुआवजा

    November 18, 2025

    SC की चेतावनी: आरक्षण 50% से ज्यादा हुआ तो चुनाव रोकने तक जा सकते हैं कदम

    November 18, 2025
    विज्ञापन
    विज्ञापन
    हमसे जुड़ें
    • Facebook
    • Twitter
    • Pinterest
    • Instagram
    • YouTube
    • Vimeo
    अन्य ख़बरें

    नशामुक्त अभियान देश को खुशहाल बनाने का अभियान : मंत्री कुशवाह

    November 18, 2025

    नियमित फॉलोअप करें और समयसीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ कार्य करें पूर्ण: उप मुख्यमंत्री शुक्ल

    November 18, 2025

    फरीदाबाद में ब्रेनवॉश के बावजूद जसीर वानी ने सुसाइड बॉम्बर बनने से किया इनकार

    November 18, 2025

    एमपी ट्रांसको के 48 वर्ष पुराने पिपरिया 132 के.वी. सब स्टेशन का रिमॉडलिंग कार्य पूर्ण

    November 18, 2025
    हमारे बारे में

    यह एक हिंदी वेब न्यूज़ पोर्टल है जिसमें ब्रेकिंग न्यूज़ के अलावा राजनीति, प्रशासन, ट्रेंडिंग न्यूज, बॉलीवुड, खेल जगत, लाइफस्टाइल, बिजनेस, सेहत, ब्यूटी, रोजगार तथा टेक्नोलॉजी से संबंधित खबरें पोस्ट की जाती है।

    Disclaimer - समाचार से सम्बंधित किसी भी तरह के विवाद के लिए साइट के कुछ तत्वों में उपयोगकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत सामग्री ( समाचार / फोटो / विडियो आदि ) शामिल होगी स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक इस तरह के सामग्रियों के लिए कोई ज़िम्मेदार नहीं स्वीकार करता है। न्यूज़ पोर्टल में प्रकाशित ऐसी सामग्री के लिए संवाददाता / खबर देने वाला स्वयं जिम्मेदार होगा, स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक, संपादक की कोई भी जिम्मेदारी नहीं होगी. सभी विवादों का न्यायक्षेत्र रायपुर होगा

    हमसे सम्पर्क करें
    संपादक -
    मोबाइल -
    ईमेल -
    कार्यालय -
    March 2026
    M T W T F S S
     1
    2345678
    9101112131415
    16171819202122
    23242526272829
    3031  
    « Nov    
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • Home
    • About Us
    • Contact Us
    • MP Info RSS Feed
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.